खेती में गाय और केंचुए को लेकर चल रही है खींचतान

कपड़े का मशहूर ब्रांड गैप समाज और कारोबार में बढ़त पाने की खातिर गोबर पर आधारित प्राकृतिक खेती का समर्थन कर रहा है। यही वजह है कि भारत में गायों की संख्या कम होने से गैप चिंतित है।

इस ब्रांड का ऑर्गेनिक फार्मिंग यानी जैविक खेती के समर्थकों से वैचारिक टकराव चल रहा है। कंपनी का मानना है कि अगर उसे अपने ब्रांड के लिए समाज में एक निश्चित मुकाम दिलानी है तो इसका सबसे बढ़िया तरीका है कि प्राकृतिक खेती का समर्थन किया जाए। इस तरह की खेती के लिए गाय का गोबर और गोमूत्र बहुत ही जरूरी तत्त्व हैं।

ऐसे बनाए ऊसर भूमि को उपजाऊ

उपजाऊ

ऐसे बनाए ऊसर भूमि को उपजाऊ

ऊसर सुधार का कार्यक्रम जून में ही शुरु कर देना चाहिए। ऊसर सुधार करने से पहले अपने स्थानीय ग्राम, खंड अथवा जिला विकास अधिकारी से संपर्क कर ऊसर सुधार संबंधी योजना/परियोजना, अनुदान और प्रशिक्षण कैम्पों की जानकारी ले लें। ऊसर सुधार के लिए कुछ महत्वपूर्ण चरण हैं।

उपजाऊ मिट्टी नासमझी और मनमानी से बन रही जहर

इटारसी। सोना उगलने वाले होशंगाबाद जिले की उपजाऊ मिट्टी किसानों की नासमझी और मनमानी की वजह से जहर में तब्दील होती जा रही है। बंपर पैदावार के मामले में पंजाब जैसे कृषि प्रधान प्रदेश को पीछे छोड़ने वाले जिले में कीटनाशक दवाओं के अंधाधुध प्रयोग से मिट्टी में मौजूद आर्गेनिक तत्वों का असंतुलन बढ़ता जा रहा है। इससे जहां पैदावार प्रभावित हो रही है वहीं रासायनिक तत्वों से पैदा अनाज के सेवन से मानव शरीर को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ रहा है। निकट भविष्य में रासायनिक खेती के गंभीर दुष्परिणाम किसानों को भुगतना पड़ सकते हैं।

किसानों को नहीं परवाह

ग्रीन हाउस किसानो के लिए वरदान

ग्रीन हाउस किसानो के लिए वरदान

ग्रीन हाउस के माध्यम से किसान कम लागत में अपने सपनों को नई उडान दे सकते है | ग्रीन हाउस कि तकनीक काफी किफायती है | कम जगह में अच्छी फसल देना इसकी खूबी है | ग्रीन हाउस में बहुत अधिक गर्मी है या सर्दी से फसलों कि रक्षा करते है,धुल और बर्फ के तूफानों से पौधों कि ढाल बनते है और किटों को बाहर रखने में मदद करते है,प्रकाश और तापमान नियंत्रण कि वजह से ग्रीन हाउस कृषि के अयोग्य भूमि को कृषि योग्य भूमि में बदल देता है | यह तकनीक पौधों को प्रतिकूल दशाओं के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करती है | कृषि से सम्बन्ध रखने वाले युवा जो पहले खेती करना छोड़कर नौकरी के लिए शहर कि तरफ जाने लगे थे | वो अब ग्रीन हाउस कि

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