जैविक खेती

19 खरब 50 अरब 40 करोड़ का सालाना व्यापार बस हम सब को बीमार बनाने के लिऐ हो रहा है

19 खरब 50 अरब 40 करोड़ का सालाना व्यापार बस हम सब को बीमार बनाने के लिऐ हो रहा है। नहीं विश्वास हो रहा ना इस अणपढ़ जाट की बात पर तो ये लेख ध्यान से पढ़णा:-

बौद्धिक लड़ाई ना एक दिन में लड़ी जाती और ना जीती जाती, इस के लिए तो सैकड़ों साल लगते हैं और पीढियाँ की पीढियाँ खप जाती हैं। एक बौद्धिक लड़ाई है जैविक कृषि बनाम रसायनिक कृषि और अंत में विजय जैविक खेती की ही होनी है कंपनियां चाहे जो मर्जी कर लें।

नीम से करें 350 दुश्मन कीट का खात्मा

नीम औषधीय गुणों की खान है। यह कृषि उपयोग में लाए जाने वाले कीटनाशकों का भी असरदार विकल्प है। इन्हीं विशेषताओं के चलते आज नीम खेती-बाड़ी के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है। बेशक नीम के गुणों को आयुर्वेद के जन्मदाता भारत ने भुला दिया हो लेकिन विदेशों ने इस पर सिर्फ काम किया बल्कि इसके गुणों का दोहन भी किया। जानकारी के अनुसार जापान अब तक नीम से बने 59 उत्पाद, अमेरिका 54 उत्पाद, भारत 36 उत्पाद और इंग्लैंड 6 उत्पादों को पैटेंट करवा चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार नीम से करीब 350 किस्मों के हानिकारक कीटों का खात्मा हो सकता है। नीम से जो कीटनाशक तत्व प्राप्त होता है, उसे अजादिरिक्टन कहते हैं। यह भी की

जैविक खेती , खेतो और किसानो के लिए वरदान

Organic Farming

Organic Farming जैविक खेती को नाम वैज्ञानिको ने दिया है क्योंकि वो वर्तमान में हो रही खेती को पारम्परिक खेती मानते है | वैसे अगर भारत की बात करे तो भारत में आजादी से पहले पारम्परिक खेती जैविक तरीके से ही की जाती थी जिसमे किसी भी प्रकार के रसायन के बिना फसले पैदा की जाती थी लेकिन आजादी के बाद भारत को फसलो के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए हरित क्रान्ति की शुरुवात हुयी जिसमे रसायनों और कीटनाशको की मदद से उन फसलो का भी भरपूर मात्रा में उत्पादन किया जाने लगा जिसके बारे में कभी सोच भी नही सकता था | हरित क्रान्ति के कारण गेंहू म ज्वार , बाजरा और मक्का की खेती में काफी विकास हुआ था |

खरीफ फसल पर सामयिक चर्चा

kharif crop

1 जिन खेतो में जल भराव की स्थिति निर्मित हो जल निकासी की यथा सम्भव कोशिश करे।
2 डोरा कुल्पा विडर् व् निराई गुड़ाई द्वारा खेत से खरपतवार निकाले।
3 लगातार बारिश हो ये नही कर पाये खरपतवार ज्यादा हो तो अत्यंत आवश्यक होने पर ही पूरी सावधानी से खरपतवार नाशक रसायन का प्रयोग करे। प्रति वर्ष न करे।अगली फसल का चयन सावधानी से करे।
4 ध्यान रहे खरपतवार से ज्यादा खतरनाक weedicide हे।
5 एकीकृत किट प्रबंधन अपनाये।
6 मित्रकीटो को आश्रय दे, पंछी के बैठने के Y स्थान बनाये
7 प्रकाश फेरोमेन स्टिकी ट्रेप का प्रयोग करे

बिना प्रमाणीकरण के भी जैविक खेती के उत्पादों का अच्छा मूल्य मिलना संभव

PGS Certificates

प्रमाणीकरण उपभोक्ताओं को दिलाया जाने वाला लिखित विश्वाश है जिसके आधार पर उपभोक्ता बिना उत्पादक से सीधा संपर्क किये यह विश्वाश कर सकता है की वो जो उत्पाद खरीद रहा है उसका उत्पादन जैविक खेती के मानकों के अनुसार ही हुआ है। यह लिखित विश्वाश उन उपभोक्ताओं और आयतकों के लिए उपयोगी है जो दूसरे देशों में रहते है और हमारे देश में आकर उत्पादन को देख पाना व्यवहारिक नही है। अतः निर्यात के लिए बनाये गए उत्पादों का प्रमाणीकरण एक आवश्यकता हो सकती है किन्तु हमारे देश के एक अरब से भी ज्यादा उपभोक्ताओं को बिना प्रमाणीकरण के भी विश्वाश पैदा किया जा सकता है (उत्पाद के पैकेट पर बिना प्रमाणीकरण के "100 प्रतिशत जै

गोपाल जैविक खेती केन्द्र ‪फार्म अपडेट

#‎GopalJaivikKheti‬

* हाथ के विडर से खरपतवार नियंत्रण
* रसायन मुक्त लहसुन
* लहसुन की कटाई
* गाजर का फूल बीज के तैयार हो रहा है

(जैविक खेती मॉडल फार्म 4)
गोपाल जैविक खेती केन्द्र 
#‎GopalJaivikKheti‬


अर्जुन पाटीदार s/o कालूराम पाटीदार 
ग्राम -गुराडिया प्रताप 
तहसील -सुवासरा 
जिला -मन्दसौर 
मध्य प्रदेश 
पिनकोड 458888
खेत का नाम -गोपाल जैविक खेती केन्द्र 
दुरभाष -09424042800

Alexa: 7,16,183

कृषि में गोमूत्र और गोबर का महत्व

Cow Dung

भारत में और भारत के अतिरिक्त अन्य देशों में गाय का महत्व मुख्य रूप से दूध और दूध से बने अन्य व्यंजनों के लिए किया जाता है। किन्तु, गाय के मूत्र और गोबर का महत्व कुछ कम नहीं है। हम सभी कृषि में खाद के उपयोग और महत्व को भली-भांति परिचित हैं। अच्छी फसल के लिए केंचुए की खाद, सड़ी-गली पत्तियों की खाद, रासायनिक खाद आदि इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त गोमूत्र और गोबर उत्तम उर्वरक के रूप में प्रयोग किए जाते हैं।

जैविक खेती के लाभ

Organic Farming, Farming, Indian Farming, Non-Chemical

स्वस्थ भोजन :- 

यु.एस.ए. में जैविक और पारंपरिक खाने के पौष्टिक तत्त्व पर एक अध्यन के अनुसार, पूर्व ज्यादा स्वस्थ जनक है! सेब, नाशपती,आलू, मक्का, गेहू, और शिशु के खाने का विश्लेषण किया गया जिससे बेकार तत्त्व जैसे ऐल्यमिनीअम, कैड्मीअम,  लेड, और मर्क्यरी, और अच्छे तत्त्व जैसे बोरॉन, कैल्सियम, आयरन  और ज़िंक का पता लगाया गया. जैविक खाने मे २०% प्रतिशत कम बेकार तत्त्व और लगभग १००% प्रतिशत ज्यादा अच्छे तत्त्व होते है!

मिट्टी की गुणवत्ता मे सुधार:-

अमृत जल

Amrit Jal, Amrut Jal

यह गोबर, गौ-मूत्र और गुड को मिला कर बनया गया एक ऐसा घोल है जिसमें अवात जीवी सूक्ष्मजीवों की संख्या और विविधता बहुत अधिक होती है। इसमें मौजूद रासायनिक तत्व मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और सूक्ष्मजीव मिट्टी के भौतिक और रासानिक गुणों को बढ़ाते हैं।

अमृत जल तैयार करने के लिए आवष्यक सामग्री क्या है ?

साकेत मार्गदर्शिका जनवरी 2016

साकेत मार्गदर्शिका जनवरी 2016 के प्रथम अंक का विमोचन करने सौभाग्य मुझे मिला मै अत्यंत रोमांचित हु।
पुरी साकेत टीम एवम् सजीव खेती के क्षेत्र में कार्यरत सभी किसान भाइयो को बधाई।
मेरी समस्त शुभकामनाएं
जहरमुक्त खेती के लिए किसान भाइयो व् सह्रदय रसायन मुक्त खाद्य पदार्थो के उपभोक्ता भाइयो के लिए...
हम अच्छा पैदा करे अच्छा खाये स्वस्थ रहे।
जैविक सजीव खेती ही सबके लिए कल्याणकारी हे।
कृपया डाऊनलोड कर पढ़े व् अपनी अमूल्य राय जरूर दे।

साकेत मार्गदर्शिका जनवरी २०१६ https://goo.gl/tPgCzY

एक बीघा जमीन – सिर्फ एक गाय और एक नीम

Dr. Arun K Sharma

एक हैक्टेयर (100 मीटर x 100 मीटर) भूमि में लगभग 6 बीघा होते है, अक्सर किसान भाई बीघा नाम को ही आधार मानकर खेती की सभी गणनाएं (नाप-तोल) करते है | इसलिये एक बीघा में जितनी खाद व् जैविक कीट नियंत्रक की आवश्यकता होती है उसी की गणना की जाये तो आसानी रहेगी |

जीवाणु खाद मिट्टी के लिये वरदान

Organic Farming, Organic Fertilizer

(किसान जागरूकता कार्यक्रम में राधा कान्त जी के विचारो के अंश)

पौधों की उचित वृद्धि एवं ज्यादा उपज के लिये नाइट्रोजन, स्फूर, पोटाश तथा अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है । यह पोषक तत्व रासायनिक खाद द्वारा पौधों को उपलब्ध कराये जाते हैं । मिट्टी में कुछ ऐसे भी सूक्ष्मजीवी जीवाणु है जो पौधों को मिट्टी में डाले गये पोषक तत्वों को उपलब्ध कराने में मदद करते हैं । जब ऐसे जीवाणुओं की संख्या  प्रयोगशाला में बढ़ा कर ठोस माध्यम में मिश्रित कर पैकेट के रूप में किसानों को उपलब्ध कराये जायें तो उसे ''जीवाणु खाद'' कहते हैं ।

हरित क्रांति से उपजी भ्रांति

Agriculture, A.K.Sharma, Organic Farming

19वीं और 20वीं शताब्दी में जो अकाल पड़े उनमें अन्न की कमी नही थी वरन उसकी वितरण व्यवस्था की कमियां थी | साथ ही 800 वर्ष के विदेशी शासन ने इस व्यवस्था को काफी कमजोर किया तथा आक्रंताओ ने अपना हित सर्वोपरि रखा |

मिश्रित खेती के होते हैं मिश्रित लाभ

मिश्रित खेती में मनुष्य, पशु, वृक्ष और भूमि सभी एक सूत्र में बंध जाते हैं. सिंचाई की सहायता से भूमि, मनुष्य और पशुओं के लाभ के लिए, फसलें और वृक्ष पैदा करती है और इसके बदले में मनुष्य और पशु खाद द्वारा भूमि को उर्वरक बनाते हैं. इस प्रकार की कृषि-व्यवस्था में प्रत्येक परिवार एक या दो गाय या भैंस, बैलों की जोड़ी और, यदि सम्भव हो तो, कुछ मुर्गियां भी पाल सकता है. थोड़ी सी भूमि में शाक-तरकारियां उगा सकता है, खेतों में अनाज आदि की फसलें पैदा कर सकता है और मेड़ों के सहारे घर-खर्च के लिए या बेचने के लिए फल देने वाले वृक्ष उगा सकता है.

जैविक खेती: प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती

Organic Farming

संपूर्ण विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या एक गंभीर समस्या है, बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान के चक्र को (इकोलाजी सिस्टम) प्रभावित करता है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति खराब हो जाती है, साथ ही वातावरण प्रदूषित होता है तथा मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आती है। 

तेन्दुआ आयरन प्लाऊ

Agricultural Equipment

• अनुमोदित दर 1680/- (बीम सहित) 
• यह देशी हल का उन्न्त स्वरूप है। इसके सभी भाग लोहे के बने होते हैं, जिससे लकड़ी की बचत होती है। 
• यंत्र के उपयोग के लिये एक जोड़ी बैल की आवश्यकता होती है। 
• छोटे बैल भी आसानी से खींच सकते हैं क्योंकि देशी हल की तुलना में यह हल्का हैं। 
• इस यंत्र की कार्यक्षमता लगभग आधा एकड़ प्रतिदिन हैं 
• गॉंव के लोहार द्वारा सुधारा जा सकता है एवं शेयर घिसने पर बदला जा सकता है।

जैविक बनाम रासायनिक खेती

Organic vs InOrganic

आमतौर पर यह माना जाता है कि ज्यादा मात्रा में रासायनिक खाद एवं कीटनाशक इस्तेमाल करने से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और उत्पादन बढ़ने से किसान का मुनाफा बढ़ सकता है। सरकार भी किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने की सलाह देती है, लेकिन इस वैज्ञानिक विधि का अर्थ सिर्फ और सिर्फ रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल तक ही सीमित होता है। नतीजतन आए दिन हम विदर्भ, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा आत्महत्या करने की खबरें सुनते रहते हैं। इसके अलावा रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से अनाज, सब्जियां, दूध और पानी, जो इंसान के जीवन का प्रमुख आधार हैं, जहरीले बनते जा रहे

आज हम सब क्या खा रहे है सब्जी या जहर

Poison in Food

लौकी, खीरा, कद्दू, तरबूज स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है यदि कडवी हो तो इसका सेवन जानलेवा साबित हो सकता है वनस्पति शास्त्र में यह कुकुरबिटेसी खानदान में आती है कुकुरबिटेसी खानदान के फल काम्प्लेक्स यौगिक बनाते है इस घटना से हमे यह समझना चाहिए की कुछ भी वनस्पति पेड़ पौधे से जुडा हानिकारक नहीं हो सकता सबसे ज्यादा कुकुरबिटेसी खानदान की सब्जियां फल ज्यादा तापमान कम पानी मिटटी की कम उपजता के कारण अनेक रसायन बनाते है कडवे फल खाने से शरीर के सभी अंग काम करना बंद कर देते है गलत तरीके से सब्जियों के रख-रखाव से जहरीले रसायन बन जाते है जिससे लीवर में सूजन , पैनक्रियाज , गाल ब्लैडर , किडनी यह रक्त में घुल ज

एक गाय से तीस एकड़ की खेती : सुभाष पालेकर

Desi Gaay

देश के प्रख्यात शोध कृषक व शून्य लागत खेती के जनक सुभाष पालेकर ने कहा कि जैविक व रसायनिक खेती प्राकृतिक संसाधनों के लिए खतरा है। इनसे अधिक लागत पर जहरीला अनाज पैदा होता है। जिसे खाकर मानव बीमार और धरती बंजर हो रही है। जीव, जमीन, पानी और पर्यावरण को बचाने तथा सुस्वास्थ्य के लिए एक मात्र उपाय है कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती। इसके लिए तीस एकड़ पर सिर्फ एक गाय पालने की जरूरत है। एक गाय से ही शून्य लागत पर प्राकृतिक खेती करके प्रत्येक किसान हजारों की बचत के साथ देश व समाज की भलाई भी कर सकता है।

गोबर गैस संयंत्र – ऊर्जा का खजाना, खाद का कारखाना

Biogas

प्राकर्तिक रूप से प्राणियों के मृत शरीर एवं वनस्पति विघटित होकर सेंद्रिय खाद के रूप में मिट्टी में मिल जाते है. विघटन की यह प्रक्रिया सूक्ष्म जीवाणुओं, बेक्टीरिया, फफूंद (फंगस) आदि के द्वारा की जाती है. इस विघटन की प्रक्रिया में गैस का निर्माण भी होता है. इस गैस को बायोगैस कहते है. यह विघटन वायु रहित एवं वायु सहित दोनों अवस्थाओं में होता है.

कैसे बिकता है प्रतिबंधित कीटनाशक?

Pesticides

आपसे बेहतर इस तथ्य को कौन समझ सकता है कि खेती के मामले में जहर पर हमारी निर्भरता कितनी बढ़ चुकि है। फसल उगाने से पहले खेत में जहर डालना शुरू करते हैं तो भण्डारण तक नहीं रूकते। बात यहीं खत्म हो जाती तो गनीमत था, अब तो फल-सब्जियों को पकाने और देर तक ताजा रखने के लिए भी जहर का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। एक आश्चर्यजनक सच्चाई यह भी है कि दुनिया भर में प्रतिबंधित कीटनाशकों को भारत में खुलेआम बेचा और प्रयोग किया जा रहा है। फल-सब्जियों पर इनके प्रयोग से न केवल कैंसर जैसी जान लेवा बीमारियों को सीधे न्योता दिया जा रहा है, बल्कि अल्सर, चर्म रोग, हृदय रोग, रक्तचाप जैसी बीमारी भी तेजी से फैल रही हैं

जैविक बनाम रासायनिक खेती

Mulching, Organic Farming

आमतौर पर यह माना जाता है कि ज्यादा मात्रा में रासायनिक खाद एवं कीटनाशक इस्तेमाल करने से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और उत्पादन बढ़ने से किसान का मुनाफा बढ़ सकता है। सरकार भी किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने की सलाह देती है, लेकिन इस वैज्ञानिक विधि का अर्थ सिर्फ और सिर्फ रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल तक ही सीमित होता है। नतीजतन आए दिन हम विदर्भ, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा आत्महत्या करने की खबरें सुनते रहते हैं। इसके अलावा रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से अनाज, सब्जियां, दूध और पानी, जो इंसान के जीवन का प्रमुख आधार हैं, जहरीले बनते जा रहे

धान की कटाई, मड़ाई, सुखाई एवं भण्डारण कैसे करे

Crop Storage

विश्व में भारत धान उत्पादन मे चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश मे लगभग 50 प्रतिशत से अधिक लोग चावल का उपयोग करते हैं। परंतु कटाई से लेकर भंडारण तक लगभग 10 प्रतिशत धान की क्षति हो जाती है। कटाई एवं इसके उपरांत धान में होने वाली क्षति को कम करने की आवश्यकता आज के समय में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह पाया गया है कि कटाई, मड़ाई, सुखाना एवं भण्डारण के दौरान क्षति अधिक होती है। इस क्षति से बचने के लिए वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग करना जरूरी है। इन्हीं कुछ विधियों का विवरण यहां प्रस्तुत किया गया है।

जैविक खेती के मुख्य घटक

1.आच्छादान
(अ) मृदाच्छादन : हम जब दो बैलों से खींचने वाले हल से या कुल्टी (जोत) से भूमि की काश्तकारी या जोताई करते हैं, तब भूमि पर मिट्टी का आच्छादन ही डलते हैं। जिस से भूमि की अंतर्गत नमी और उष्णता वातावरण में उड़कर नहीं जाती, बची रहती है।
(ब) काष्टाच्छादन : जब हम हमारी फ़सलों की कटाई के बाद दाने छोड़कर फ़सलों के जो अवशेष बचते हैं, वह अगर भूमि पर आच्छादन स्वरूप डालते हैं, तो अनंत कोटी जीवजंतु और केंचवे भूमि के अंदर बाहर लगातार चक्कर लगाकर चौबीस घंटे भूमि को बलवान, उर्वरा एवं समृद्ध बनाने का काम करते हैं और हमारी फ़सलों को बढ़ाते हैं।

बायोगैस क्या है?

बायोगैस ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत है, जिसका बारंबार इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उपयोग घरेलू तथा कृषि कार्यों के लिए भी किया जा सकता है।

बायोगैस क्या है?

इसका मुख्य घटक हाइड्रो-कार्बन है, जो ज्वलनशील है और जिसे जलाने पर ताप और ऊर्जा मिलती है। बायोगैस का उत्पादन एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया द्वारा होता है, जिसके तहत कुछ विशेष प्रकार के बैक्टीरिया जैविक कचरे को उपयोगी बायोगैस में बदला जाता है। चूंकि इस उपयोगी गैस का उत्पादन जैविक प्रक्रिया (बायोलॉजिकल प्रॉसेस) द्वारा होता है, इसलिए इसे जैविक गैस (बायोगैस) कहते हैं। मिथेन गैस बायोगैस का मुख्य घटक है।

जैविक खेती पर्यावरण के लिए खतरा नही बल्कि लाभकारी

 कुछ दिनों पहले मैंने समाचार पत्र के माध्यम से सुना की कुछ बैज्ञानिकों ने जैविक को रासायनिक खेती की तरह ही दर्जा दे डाला  हमार देश के विशेषज्ञ वही बात ही बोल रहे है जो कुछ समय पहले अमेरिका ने कहा था मुझे ये समझ नही आता है की हमारे विशेषज्ञ अपना परीक्षण करने के बजाय पश्चिमी देशो द्वारा दिया गया त्थ्थों को क्यों दोहराते है 
अमेरिका ने कहा है तो सत्य ही होगा ऐसी अबधारना हमारे ऊपर हाबी हो चुकी है 

बिहार में जैविक उत्पादों का प्रमाणीकरण

बिहार राज्य के अधिकांश क्षेत्रों की मिट्टी एवं जलवायु जैविक खेती के अनुकूल है | यहाँ के कृषकों द्वारा जैविक खेती भी किया जा रहा है परन्तु राज्य में उत्पादित जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण की कोई सरकारी अथवा गैर सरकारी एजेंसी नहीं होने के कारण प्रमाणीकरण का कार्य पूर्णतया बाहरी एजेंसियों पर निर्भर है | इस कारण कृषकों द्वारा काफी पैसे खर्च करने के बावजूद समय पर प्रमाणीकरण का कार्य नहीं हो पता है |

धान का भण्डारण

वर्ष भर धान की उपलब्धता बनी रहे इसके लिये इसका उचित भंडारण जरूरी है। भण्डारण के पूर्व धान में नमी की मात्रा सुरक्षित करनी चाहिए। लम्बी अवधि के भण्डारण हेतु नमी की मात्रा 12 प्रतिशत एवं अल्पावधि भण्डारण हेतु 14 प्रतिशत होनी चाहिए। भण्डारण से पहले या बाद मे भंडारित कीटो से बचाव का भी प्रबंध करना आवश्यक है। भण्डारण हेतु विभिन्न आकारों, किस्मों एवं सामाग्रियों के बने पात्र प्रयोग किए जाते हैं। ये मिट्टी, लकड़ी, बांस, जूट की बोऱियों, ईंटों कपड़ो आदि जैसी स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री से बनाए जाते हैं। यद्यपि ऐसे पात्रों में लम्बी अवधि हेतु भण्डारण संभव नहीं होता है क्योंकि इनमें वायुरोधक क्षमता

दीमक नियंत्रण

1. मक्का के भुट्टे से दाना निकलने के बाद, जो गिण्डीयॉ बचती है, उन्हे एक मिट्टी के घड़े में इक्टठा करके घड़े को खेत में इस प्रकार गाढ़े कि घड़े का मुँह जमीन से कुछ बाहर निकला हो। घड़े के ऊपर कपड़ा बांध दे तथा उसमें पानी भर दें। कुछ दिनों में ही आप देखेगें कि घड़े में दीमक भर गई है। इसके उपरांत घड़े को बाहर निकालकर गरम कर लें ताकि दीमक समाप्त हो जावे। इस प्रकार के घड़े को खेत में 100-100 मीटर की दूरी पर गड़ाएॅ तथा करीब 5 बार गिण्डीयॉ बदलकर यह क्रिया दोहराएं। खेत में दीमक समाप्त हो जावेगी।

 

मटका खाद

देशी गाय का 20  लीटर गौमूत्र  , 20 किलो गुड , 1 किलो चने का बेसन सभी को मिलाकर 1 बड़े मटके में भरकर 10-15 दिन तक सडाएं फिर उसे 400 लीटर पानी में घोलकर किसी भी फसल में गीली या नमीयुक्त जमीन में फसलों की कतारों के बीच में अच्छी तरह से प्रति एकड़ छिडकाव करें . हर 15 दिन बाद इस क्रिया को दोहराएं . इस तरह फसल भी अच्छी होगी , पैदावार भी बढ़ेगी , जमीन भी सुधरेगी और किसी भी तरह के खाद की आवश्यकता नहीं पड़ेगी . इस तरह से किसान आत्मनिर्भर होकर बाजार मुक्त खेती कर सकता है और जहरमुक्त , रसायन मुक्त स्वादिष्ट और पौष्टिक फसल तैयार कर सकता है .

बीज संस्कार करने के सूत्र

बीज संस्कार करने के लिए छोटा सा सूत्र क्या हैं ? तीसरी जानकारी आपको देना चाहता हूँ कि अच्छी फसल लेने के लिए जो बीज आप खेत में डालते हैं, उस बीज को आप पहले संस्कारित करिए, फिर मिट्टी में डालिए। बीज संस्कार करने के लिए छोटा सा सूत्र बताना चाहता हूँ।

मान लीजिए आपको गेहूँ का बीज लगाना हैं। तो बीज ले लीजिए एक किलो। एक किलो बीज के अनुसार में ये सूत्र बता रहा हूँ। अगर बीज दो किलो है तो सबको दुगुना कर लीजिएगा।